Ekishvi Sadi Ki Kahaniyo Me Chitrit Aam Aadmi Ki Samshaye
पा�रवा�रक बोध à¤à¤µà¤‚ दामपतà¥à¤¯ जीवन, नारी , वेशà¥à¤¯à¤¾à¤µï¿½à¥ƒà¤¤, कनà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥à¤°à¤£à¥‚ हतà¥à¤¯à¤¾
इकà¥à¤•ीसवीं सदी में सयंकà¥à¤¤à¥ परवार से à¤à¤•ल परवार की ओर बà¥à¤¤à¥‡ हà¥à¤ अब अपने कठनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका टूटना, बखरना तथा असरकà¥à¤·à¤¤à¥ होना अपने आप में à¤à¤• गà¤à¤‚ीर समसà¥à¤¯à¤¾ है। सामानà¥à¤¯ परवारों में यह समसà¥à¤¯à¤¾ आम दखाई देती है। वनोदीनी की पà¥à¤°à¤¯ कहानी ‘सà¤à¤¦à¥à¤°à¤¾à¥ देवी’ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कहती हैं। "आजकल यवाॠपीà¥à¥€ à¤à¤• या दो बचà¥à¤šà¥‡à¤‚ ही पदैा करना चाहती है।" कà¥à¤¯à¥‹à¤• 19 वीं सदी में सयंकà¥à¤¤à¥ परवारों में कई-कई बचà¥à¤šà¥‡ होते थे, लेकन वतमान समय में यह बोठकोई पसदं नहीं करता है। दखॠकी घड़ी म ैं सà¤à¥€ परवार à¤à¤•जटॠहो जाते थे, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में शोषण की मखà¥à¤¯à¥ समसà¥à¤¯à¤¾ लगं à¤à¥‡à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ ही है। पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल से लेकर लगं à¤à¥‡à¤¦ की पà¥à¤°à¤¥à¤¾ आज à¤à¥€ पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¤ है। शकà¥à¤·à¤¤ वग के लोग à¤à¥€ नारी का अधक शोषण करते हैं, लड़की पदैा होने पर उसे घरेल ूहसंा का शकार बनना पड़ता है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚क वशं परंपरा को आगे बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लठपतà¥à¤°à¥ की इचà¥à¤›à¤¾ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ की जाती है।
सà¥à¤µà¤¤à¤¤à¥à¤°à¤‚ता के बाद नींवहीन, ततà¥à¤¤à¥à¤µà¤¹à¥€à¤¨, लकà¥à¤·à¥à¤¯à¤¹à¥€à¤¨ राजनीत के कारण देश का पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• वग à¤à¥€ दगà¥à¤à¥à¤°à¤®à¤¤ होता जा रहा है। लोगों को अपना जीवन अनिशà¥à¤šà¤¤ सा लगने लगता है। जनता की तरफ से चनेॠजाने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ राजनेता वग अपने नैतक मलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ू को à¤à¤²à¤•रू सता का उपयोग अपने सà¥à¤µà¤¾à¤¥ की सदà¥à¤§ के लठकरना आरंठकर देते हैं। जबक नैतक मलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ू के दà¥à¤µà¤¾à¤¸ से राजनीत में à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤° का बोल-बाला अधक बॠगया। यह आजादी सफ राजनेताओं की आजादी बन कर रह गई।
"Ekishvi Sadi Ki Kahaniyo Me Chitrit Aam Aadmi Ki Samshaye
", TIJER - TIJER - INTERNATIONAL RESEARCH JOURNAL (www.TIJER.org), ISSN:2349-9249, Vol.12, Issue 4, page no.a719-a722, April-2025, Available :https://tijer.org/TIJER/papers/TIJER2504109.pdf
Volume 12
Issue 4,
April-2025
Pages : a719-a722
Paper Reg. ID: TIJER_157578
Published Paper Id: TIJER2504109
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Research Area: Arts All
Country: Hisar, Haryana , India
ISSN: 2349-9249 | IMPACT FACTOR: 8.57 Calculated By Google Scholar | ESTD YEAR: 2014
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Publisher: TIJER (IJ Publication) Janvi Wave